Bluetooth क्या है ? Bluetooth कैसे काम करता है ? Bluetooth कितना सुरक्षित है ?

Bluetooth Kya hai in Hindi

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Bluetooth kya hai

आज के समय में लगभग सभी लोगों को पता है कि Bluetooth क्या है ? और हर आदमी ने कहीं न कहीं किसी न किसी डिवाइस के साथ इसका इस्तेमाल किया है। अगर आप जानना चाहते हैं की ब्लूटूथ क्या है ? (what is Bluetooth in Hindi?) Bluetooth कैसे काम करता है ? और Bluetooth के कौन कौन से वर्ज़न हैं ? यह कितना सुरक्षित है? तो आज हम अपने इस पोस्ट में इन तमाम पहलुओं पर बात करेंगें।

आज के इस दौर में लगभग हर जगह हर डिवाइस के साथ ब्लूटूथ का इस्तेमाल हो रहा है। चाहें स्मार्ट फ़ोन की बात करें या लैपटॉप की या फिर स्मार्ट वाच की या वायरलेस स्पीकर की या वायरलेस इयरफोन और हेड फ़ोन की लगभग हर जगह इसका इस्तेमाल हो रहा है।

तो चलिए बात करते हैं उस टेक्नोलॉजी के बारे में जो कम बिजली की खपत, सस्ते दर के साथ एक सुरक्षित संचार तकनीक है।

ब्लूटूथ क्या है ? What is Bluetooth in Hindi?

Bluetooth

Bluetooth कम दूरी की वायरलेस कम्युनिकेशन की एक तकनीक है जो मोबाइल फोन, कंप्यूटर, लैपटॉप, प्रिंटर, डिजिटल कैमरा और वीडियो गेम जैसे उपकरणों को डेटा या आवाज़ को थोड़ी दूरी पर बिना वायर के संचारित करने की अनुमति देता है।

ब्लूटूथ के माध्यम से हमें उन वायर से छुटकारा मिल जाता है जिसका उपयोग सामान्य रूप से उपकरणों को आपस में कनेक्ट करने के लिए किया जाता है। ब्ल्यूटूथ टैक्नोलॉजी में ऊर्जा की खपत काफी कम होती  है।

ब्लूटूथ का अविष्कार 1994 में हार्टसन द्वारा किया गया था। इसको विकसित करने का उद्देश्य हीं वायर को रेप्लस करना था। ब्लूटूथ रेंज और ट्रांसमिशन स्पीड आमतौर पर वाई-फाई के रेंज और ट्रांसमिशन स्पीड से कम होती है।

परन्तु ब्लूटूथ v3.0 + एचएस ( ब्लूटूथ हाई-स्पीड टेक्नोलॉजी ) डिवाइस 24 एमबीपीएस तक डेटा का आदान प्रदान कर सकते हैं जो कि 802.11 बी वाईफाई के गति से तेज है।

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ब्लूटूथ कैसे काम करता है? How does Bluetooth work? in Hindi

वैसे तो अब लगभग सभी मोबाइल उपकरणों में ब्लूटूथ रेडियो होते हैं। पीसी और कुछ अन्य डिवाइस जिनमें इनबिल्ड ब्लूटूथ रेडियो नहीं होता है, उन्हें ब्लूटूथ डोंगल से जोड़कर ब्लूटूथ-सक्षम किया जा सकता है।

ब्लूटूथ नेटवर्क में एक पर्सनल एरिया नेटवर्क या एक पिकोनेट होता है जिसमें न्यूनतम 2 और अधिकतम 8 Bluetooth पीयर डिवाइस होते हैं। जिसमें एक मास्टर और 7 स्लेव होता है।

मास्टर ब्लूटूथ वह उपकरण है जो अन्य उपकरणों के साथ संचार शुरू करता है। स्लेव ब्लूटूथ डिवाइस वह उपकरण है जो मास्टर डिवाइस के प्रति प्रतिक्रिया करता है।

ब्लूटूथ का उपयोग

ब्लूटूथ का उपयोग आज कल अधिकतर डिवाइस में किया जाता है। उदाहरण के लिए मोबाइल, लैपटॉप, कंप्यूटर, स्मार्ट वाच, कीबोर्ड, माउस, गेमिंग डिवाइस, प्रिंटर, म्यूजिक डिवाइस आदि पर इसे कनेक्ट करके उपयोग कैसे करते हैं आइये जानते हैं।

ब्लूटूथ कनेक्ट करने की विधि

अगर हम दो ब्लूटूथ से संम्पन्न उपकरणों को आपस में कनेक्ट करना चाहते हैं तो एक डिवाइस को ऐज अ मास्टर और दूसरे को ऐज अ स्लेव यूज़ करना होगा।

दो ब्लूटूथ डिवाइस को जोड़ने की प्रक्रिया को “पेअर” कहा जाता है। ब्लूटूथ उपकरण अपनी उपस्थिति को एक दूसरे के लिए टेलीकास्ट करते हैं, और उपयोगकर्ता को उस डिवाइस की आईडी या नाम जब अपने डिवाइस पर दिखाई देता है तो वह उस ब्लूटूथ डिवाइस का चयन करता है जिससे वे कनेक्ट होना चाहता है।

ब्लूटूथ को कनेक्ट करने के लिए एक कोड भी हो सकता है जो यह सुनिश्चित करने में मदद करता है कि आप सही डिवाइस से कनेक्ट होने जा रहे हैं।

यह पेअर की प्रक्रिया अलग अलग डिवाइस के आधार पर अलग अलग हो सकती है। जिसे फॉलो करके अपने डिवाइस को दूसरे ब्लूटूथ सक्षम डिवाइस से कनेक्ट किया जा सकता है।

ब्लूटूथ कितना सुरक्षित है?

सावधानियों के साथ उपयोग किए जाने पर ब्लूटूथ को काफी सुरक्षित वायरलेस तकनीक माना जाता है। ब्लूटूथ का कनेक्शंस एन्क्रिप्टेड होता है, जिससे अन्य उपकरणों से कैज़ुअल ईव्सड्रॉपिंग को रोका जा सकता है।

ब्लूटूथ डिवाइस पेअर होने के दौरान अक्सर रेडियो फ्रीक्वेंसी को शिफ्ट करते हैं, जो आसानी से अटैक नहीं होने देता है।

ब्लूटूथ डिवाइस कई तरह की सेटिंग्स भी प्रदान करते हैं। हालांकि, किसी भी वायरलेस तकनीक के साथ हमेशा कुछ सुरक्षा जोखिम शामिल होते हैं।

औसतन ब्लूटूथ से गंभीर सुरक्षा जोखिम नहीं होता है क्यूंकि यह अज्ञात ब्लूटूथ डिवाइस से कनेक्ट नहीं होता है। अधिकतम सुरक्षा के लिए सार्वजनिक रूप से  ब्लूटूथ का उपयोग नहीं करना चाहिए।

Bluetooth के versions

Bluetooth के वर्ज़न की बात करें तो मुख्यतः वर्ज़न हैं – V1.2, V2.0, V2.1, V3.0, V4.0, V4.1 और V5.0

ब्लूटूथ V1.2

Bluetooth 1.2 (बेसिक डेटा रेट) पहली व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली Bluetooth तकनीक थी। जिसकी स्पीड या डाटा रेट 720 kbps थी। यह अपने वर्ज़न के साथ V1.1 को सपोर्ट कर सकता था।

ब्लूटूथ V2.0

Bluetooth 2.0 बढ़ी हुई डेटा दर के साथ आया।  इसमें स्पीड या डाटा रेट 2.1 एमबीपीएस तक बढ़ गया। और यह अपने वर्ज़न के साथ V1.2 को सपोर्ट कर सकता था।

ब्लूटूथ V2.1

इस वर्ज़न में सिक्योर सिंपल पेयरिंग (SSP) को जोड़ा गया ताकि डिवाइस आपस में जल्दी और सुरक्षित जुड़ सकें। इसके सुरक्षा प्रणाली में सुधार किया गया, इसमें इन्क्रिप्शन को अनिवार्य बनाया गया तथा साथ में कम ऊर्जा के खपत पर ध्यान दिया गया।

ब्लूटूथ V3.0

यह वर्ज़न अपने हाई स्पीड के लिए जाना जाता है। यह पेअर तो ब्लूटूथ के माध्यम से करता है लेकिन डाटा को wifi के माध्यम से ट्रांसमिट करता है। अगर इसके स्पीड की बात करें तो इसका डाटा रेट 24 एमबीपीएस तक का है। यह अपने वर्ज़न के साथ V2.1 को सपोर्ट कर सकता है।

ब्लूटूथ V4.0

इस वर्जन को स्मार्ट ब्लूटूथ के नाम से जाना गया। यह वर्जन न्यूनतम ऊर्जा खपत के लिए जाना गया। यह अपने वर्ज़न के साथ V3.0 को सपोर्ट कर सकता है।

ब्लूटूथ V4.1

यह वर्ज़न बेहतर डाटा एक्सचेंज के लिए और LTE सेलुलर टेक्नोलॉजी के सपोर्ट के लिए बनाया गया। Bluetooth 4.1 कम मैनुअल हस्तक्षेप के साथ कनेक्शन बनाए रखता है और डिवाइस एक ही समय में क्लाइंट और हब दोनों काम करता है, जिससे Bluetooth डिवाइस एक दूसरे के साथ संवाद कर सकते हैं। यह अपने वर्ज़न के साथ अपने से पहले के सभी वर्ज़न को सपोर्ट करता है।

ब्लूटूथ V5.0

इस वर्ज़न ने बैटरी के लाइफ को बढ़ने के साथ साथ आउटडोर ट्रांसमिशन रेंज को 50 से 200 मीटर तक बढ़ा दिया। ब्लूटूथ 5 को  सपोर्ट करने वाले पहले स्मार्टफोन गैलेक्सी एस 8 और आईफोन 8 और एक्स थे। इस वर्ज़न को ब्लूटूथ हैडफ़ोन, कीबोर्ड, माउस, म्यूजिक प्लेयर डिवाइस, स्मार्ट वाच आदि के लिए बनाया गया। इस वर्ज़न में एक हीं फ़ोन से दो हैडफ़ोन को एक साथ कनेक्ट कर सकते हैं।

ब्लूटूथ की रेंज कितनी होती है?

अब बात कर लेते हैं की ब्लूटूथ की रेंज कितनी होती है ? तो ब्लूटूथ का रेंज इसके वर्जन पर डिपेन्ड करता है। ब्लूटूथ 1.0 की गति 700Kbps के साथ लगभग 33 फीट के दायरे में होती है।

ब्लूटूथ 2.0, लगभग 100 फीट के दायरे में 2.1Mbps तक की गति दे सकता है। ब्लूटूथ 3.0 ने बैंडविड्थ को 24Mbps तक बढ़ा दिया, जबकि 2010 में अपनाई गई ब्लूटूथ 4.0 स्पेसिफिकेशन की सैद्धांतिक सीमा 200 फीट तक है।

ब्लूटूथ 5.0 की गति 48 Mbps है। इसे 985 फीट की दूरी तक जोड़ा जा सकता है। ब्लूटूथ 33 फीट की न्यूनतम सीमा निर्धारित करता है, लेकिन अधिकतम सीमा केवल डिवाइस की आउटपुट शक्ति द्वारा निर्धारित की जाती है।

ब्लूटूथ को हिंदी में क्या कहते हैं?

यह सवाल लगभग हर किसी के मन में आता है कि ब्लूटूथ को हिंदी में क्या कहते हैं? किसी भी प्रोडक्ट का नाम उसके कार्य के हिसाब से निर्धारित किया जाता है। अगर शब्द पर ध्यान दें तो इसके नाम और काम में कोई समानता नज़र नहीं आती तो अब इस सवाल का जवाब आपको जानने के लिए इतिहास के उन पन्नों पर चलना होगा जब इसका नामकरण किया गया।

ब्लूटूथ नाम 10वीं सदी के डेनमार्क के राजा हैराल्ड ब्लूटूथ से लिया गया है। हैराल्ड ब्लूटूथ ने राजनीती की एक ऐसी चाल चली जिसके चलते आपस में युद्ध करने वाले छोटे छोटे दलों ने एक दूसरे से समझौता करना शुरू कर दिया।

उनके इस कार्य से प्रभावित होकर हीं इस टेक्नोलॉजी का नाम उस राजा के नाम पर रखा गया। इस टेक्नोलॉजी का प्रयोग भी विभिन्न प्रकार के उपकरण को आपस में जोड़कर सूचनाओं का आदान प्रदान के लिए किया जाता है।

चुकी यह किसी व्यक्ति का नाम है अतः इस टेक्नोलॉजी को हिंदी में भी ब्लूटूथ हीं कहा जाता है।

Infrared और Bluetooth में क्या अंतर है?

ब्लूटूथ और इन्फ्रारेड दोनों हीं वायरलेस टेक्नोलॉजी हैं और दोनों हीं कम दुरी में उपस्थित इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के साथ काम करते हैं। परन्तु तकनीक के मामले में दोनों में ढेरो अंतर है। तो आइये जान लेते हैं कि ब्लूटूथ और इन्फ्रारेड में क्या अंतर है?

इन्फ्रारेड वायरलेस तकनीक एक डिवाइस से दूसरे डिवाइस में कनेक्ट होने और डेटा का अदान प्रदान करने के लिए इंफ्रारेड लाइट का प्रयोग करता है। ब्लूटूथ वायरलेस तकनीक एक विशेष तरह की आवृत्ति (2.4 गीगाहर्ट्ज़) पर रेडियो तरंगों का उपयोग करता है। ब्लूटूथ और इंफ्रारेड दोनों अन्य वायरलेस तकनीक की तुलना में काफी कम बिजली की खपत करते हैं।

इन्फ्रारेड वायरलेस तकनीक की प्रभावी रेंज बहुत कम है। यह 1 मीटर से 5 मीटर तक की दूरी तक को सपोर्ट करता है। जब की ब्लूटूथ की रेंज इससे बहुत ज्यादा होती है।

चुकी इन्फ्रारेड वायरलेस तकनीक डाटा के आदान प्रदान के लिए लाइट का प्रयोग करता है अतः दो वस्तुओं के बीच कम्युनिकेशन के लिए एक सीध में या एक स्पेशल एंगल में होना आवश्यक है। वहीं ब्लूटूथ प्रकाश के बजाय रेडियो तरंगों का उपयोग करता है अतः इसे किसी खास एंगल की जरूरत नहीं होती है।

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