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Operating System क्या है? और ऑपरेटिंग सिस्टम के क्या कार्य हैं ?

What is Operating System in Hindi

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operating system kya hai

कंप्यूटर, लैपटॉप और मोबाइल आज के समय में लगभग सब लोग इस्तेमाल करते हैं। इसको काम के लायक बनाने के लिए Operating System अपनी अहम भूमिका निभाता है। आपको पता है Operating System क्या है? आज इसी सवाल पर हम अपने इस पोस्ट में चर्चा करेंगें।

Mobile Phone के इस्तेमाल में हमेशा इस बात की चर्चा होती रहती है कि मेरे फ़ोन में  एंड्राइड का Lollipop, Marshmallow, Nougat, Oreo, Pie, Android 10 या फिर Android 11 है। यही एंड्राइड के वर्जन मोबाइल के Operating System हैं।

ठीक वैसे हीं Computer या Laptop यूजर के लिए विंडोज के वर्जन में XP, Vista, Windows 7, Windows 10 आदि ऑपरेटिंग सिस्टम के नाम हैं। वैसे हीं ढेरो नाम के Linex और MacOS में भी वर्जन हैं।

Operating System क्या है?

ऑपरेटिंग सिस्टम (OS) कंप्यूटर उपयोगकर्ता और कंप्यूटर हार्डवेयर के बीच एक इंटरफ़ेस का काम करता है। ऑपरेटिंग सिस्टम सॉफ्टवेयरों का समूह है जो फ़ाइल प्रबंधन, मेमोरी मैनेजमेंट, प्रोसेस मैनेजमेंट, हैंडलिंग इनपुट और आउटपुट जैसे सभी बेसिक कार्यों को करता है और कंप्यूटर से जुड़े अन्य उपकरणों को नियंत्रित करता है।

साधारण भाषा में अगर मैं समझाऊं तो कंप्यूटर या मोबाइल के जो कल पुर्जे हैं उन्हें हार्डवेयर कहा जाता है और इन हार्डवेयर को जीवित करने के लिए और दिए गए निर्देश के हिसाब से काम कराने के लिए जिस माध्यम की आवश्यकता होती है वह ऑपरेटिंग सिस्टम कहलाता है।

System Software और Application Software क्या है?

अगर बात ऑपरेटिंग सिस्टम की कर रहें हैं तो यह खाली हार्डवेयर को हीं नहीं बल्कि साथ में सॉफ्टवेयर को भी सपोर्ट करता है। उदाहरण के तौर पर अगर हम फोटो एडिटिंग का सॉफ्टवेयर या ऐप्प कंप्यूटर या मोबाइल में डालना चाहते हैं तो इसे ऑपरेटिंग सिस्टम के ऊपर हीं इनस्टॉल करते हैं।

ऑपरेटिंग सिस्टम का वह पार्ट जो अलग अलग कार्य को करने में इस्तेमाल होने वाले सॉफ्टवेयर को सपोर्ट करता है। System Software कहलाता है। उपभोगता के कार्य के हिसाब से डिज़ाइन किया गया सॉफ्टवेयर Application Software कहलाता है।

ऑपरेटिंग सिस्टम्स के नाम

आज के समय में बाज़ार में ढेरों कंपनियां हैं जो अपना ऑपरेटिंग सिस्टम देती हैं। उनमे कुछ प्रचलित नाम हैं –Windows, Android, MacOS, iOS, Linux आदि इन उत्पादों के ढेरों वर्जन हैं।

Windows :- विंडोज माइक्रोसॉफ्ट द्वारा बनाया गया ऑपरेटिंग सिस्टम है। यह होम और बिजनेस कंप्यूटर के लिए बाज़ार में उपलब्ध है। व्यक्तिगत कंप्यूटिंग के तेजी से विकास में विंडोज के 95 वर्जन का काफी अहम योगदान है।

यह ऑपरेटिंग सिस्टम उपयोगकर्ता के काफी अनुकूल और इस्तेमाल में काफी आसान था।

Mac OS :- यह OS Apple के Macintosh लाइन पीसी और वर्कस्टेशन के लिए ऑपरेटिंग सिस्टम है।

Unix :- यूनिक्स एक बहुउद्देशीय ऑपरेटिंग सिस्टम है जो फ्लेक्सिबल और यूजर के अनुकूलन बनाया गया है। यूनिक्स सी भाषा में लिखे जाने वाले पहले ऑपरेटिंग सिस्टमों में से एक था।

Linux :- लिनक्स एक यूनिक्स जैसा हीं ऑपरेटिंग सिस्टम है जो पीसी उपयोगकर्ताओं को फ्री में या कम लागत में उपलब्ध है। लिनक्स को फ़ास्ट ऑपरेटिंग सिस्टम के रूप में जाना जाता है।

Mobile operating system :- मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम को मोबाइल कंप्यूटिंग और संचार के लिए प्रयोग होने वाले उपकरणों जैसे स्मार्टफोन और टैबलेट की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किया गया है।

मोबाइल डिवाइस आमतौर पर पारंपरिक पीसी की तुलना में सीमित कंप्यूटिंग संसाधनों को उपलब्ध करते हैं। Apple iOS और Google Android मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम के उदाहरण हैं।

ऑपरेटिंग सिस्टम के प्रकार Types of Operating Systems in Hindi

Operating Systems के प्रकार निम्नलिखित हैं।

  • Batch Operating System
  • Time-Sharing Operating Systems
  • Distributed Operating System
  • Network Operating System
  • Real-Time Operating System

Batch Operating System क्या है?

इस प्रकार का ऑपरेटिंग सिस्टम सीधे कंप्यूटर से इंटरैक्ट नहीं होता है। इसमें ऑपरेटर एक समान जरुरत वाले समान कार्य लेता है और उन्हें बैचों में समूहित करता है। इस ओएस में यह ऑपरेटर की जिम्मेदारी है कि वह समान जरूरतों वाले कार्यों को छांटे और उन्हें एक साथ रन करे।

Time-Sharing Operating Systems क्या है?

टाइम-शेयरिंग एक ऐसी Technology है जिसके द्वारा एक हीं कंप्यूटर को विभिन्न टर्मिनलों पर से अलग अलग उपयोगकर्ता द्वारा उपयोग करने के लायक बनता है। प्रोसेसर का समय जो एक साथ कई उपयोगकर्ताओं के बीच साझा किया जाता है, को टाइम-शेयरिंग कहा जाता है।

इस ओएस में प्रत्येक कार्य को पूरा करने के लिए कुछ समय दिया जाता है, ताकि सभी कार्य अच्छी तरह से पूरा हो सकें। प्रत्येक उपयोगकर्ता को सीपीयू का समय दिया जाता है क्योंकि वे एक हीं सिस्टम का उपयोग करते हैं।

इन प्रणालियों को मल्टीटास्किंग सिस्टम के रूप में भी जाना जाता है। प्रत्येक कार्य को पूरा करने के लिए मिलने वाले समय को क्वांटम कहा जाता है। एक कार्य के पूरा होने पर हीं यह ओएस दूसरे कार्य को शुरू करता है।

Distributed Operating systems क्या है?

डिस्ट्रिब्यूटेड सिस्टम कम्प्यूटर्स का एक ग्रुप है जो लोकली या वाइडली कनेक्ट हो सकते हैं। लोकली कनेक्टेड सिस्टम्स को Local Area Distributed systems और वाइडली कनेक्टेड सिस्टम्स को Wide Area Distributed systems कहा जाता है। ये कम्प्यूटर्स आपस में एक दूसरे से Data, RAM, Processor, आदि शेयर करते हैं जिससे किसी कार्य को करने की क्षमता और स्पीड दोनों बढ़ जाती है।

Network operating system क्या है?

एक नेटवर्क ऑपरेटिंग सिस्टम (NOS) लोकल एरिया नेटवर्क (LAN) पर काम करने वाले उपकरणों के बीच कम्युनिकेशन की सुविधा के लिए बनाया गया एक OS है। NOS नेटवर्किंग उपकरणों, जैसे कि राउटर, स्विच और फायरवॉल के लिए उपयोग की जाती है।

Real-time operating system क्या है?

रियल टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम वह ओएस है जो समय के प्राथमिकता को ध्यान में रखकर कंप्यूटिंग डिवाइस को निरंतर और अल्प समय में कम्युनिकेशन का आदान प्रदान करने के योग्य बनता है। उदाहरण के लिए ट्रैफिक सिग्नल के संचालन, नुक्लेअर रिएक्टर कण्ट्रोल साइंटिफिक एक्सपेरिमेंट्स, मेडिकल इमेजिंग सिस्टम, इंडस्ट्रियल सिस्टम, फ्यूल इंजेक्शन सिस्टम, बिजली संयंत्र के संचालन आदि में यह उपयोग होता है।

इन स्थितियों में नियंत्रण प्रणाली को वास्तविक दुनिया की स्थितियों को बदलने के लिए जल्दी और अनुमानित रूप से प्रतिक्रिया करनी होती है अन्यथा दुर्घटना हो सकता है।

Embedded operating system क्या है?

वह ऑपरेटिंग सिस्टम जो किसी खास काम के लिए डिज़ाइन किया जाता है और वह  अपने निर्धारित एक हीं काम को करे एंबेडेड ऑपरेटिंग सिस्टम कहलाता है। जैसे – होम डिजिटल असिस्टेंट, आटोमेटिक टेलर मशीन (एटीएम), हवाई जहाज प्रणाली, खुदरा बिक्री बिंदु (पीओएस) टर्मिनल और इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स (IoT) डिवाइस आदि,

ज्यादातर मामलों में एंबेडेड एक चिप पर प्रदान किया जाता है जिसे वास्तविक डिवाइस में शामिल किया जाता है। एंबेडेड लिनक्स एम्बेडेड ओएस का एक उदाहरण है।

ऑपरेटिंग सिस्टम के कार्य  Operating system functions in Hindi

ओएस एक प्रोग्राम है जो उपयोगकर्ता और कंप्यूटर हार्डवेयर के बीच एक इंटरफेस के रूप में कार्य करता है और सभी प्रकार के कार्य के निष्पादन को नियंत्रित करता है।ऑपरेटिंग सिस्टम के कुछ महत्वपूर्ण कार्य निम्नलिखित हैं।

  • Memory Management
  • Processor Management
  • Device Management
  • File Management
  • Security
  • Control over system performance
  • Job accounting
  • Error detecting aids
  • Coordination between other software and users

Memory Management

मेमोरी मैनेजमेंट प्राथमिक मेमोरी या मेन मेमोरी के प्रबंधन को दर्शाता है। मुख्य मेमोरी जिसे RAM भी कहते हैं जहां प्रत्येक शब्द या बाइट का अपना पता होता है।

मुख्य मेमोरी fast स्टोरेज प्रदान करती है जिसे सीपीयू द्वारा सीधे Access किया जाता है। किसी प्रोग्राम को निष्पादित करने के लिए उसे मुख्य मेमोरी में होना चाहिए। एक ऑपरेटिंग सिस्टम मेमोरी प्रबंधन के लिए निम्नलिखित गतिविधियाँ करता है –

  • प्राथमिक मेमोरी का हिसाब रखता है यानी इसका कौन सा भाग किसके उपयोग में है कौन सा भाग उपयोग में नहीं है इसकी जानकारी रखता है।
  • मल्टीप्रोग्रामिंग में, ओएस तय करता है कि किस प्रक्रिया को कब और कितना मेमोरी मिलेगी।
  • जब कोई प्रक्रिया अनुरोध करती है तो मेमोरी का डिस्ट्रीब्यूशन करता है ।
  • जब कोई प्रक्रिया को इसकी आवश्यकता नहीं है या इसे समाप्त कर दिया गया है तो डी-मेमोरी को फ्री कर देता है।

Processor Management

मल्टीप्रोग्रामिंग के समय में ओएस यह तय करता है कि किस प्रक्रिया में प्रोसेसर कब और कितने समय के लिए इस्तेमाल किया जाना है। इस फंक्शन को प्रोसेस शेड्यूलिंग कहा जाता है। एक ऑपरेटिंग सिस्टम प्रोसेसर मैनेजमेंट के लिए निम्नलिखित गतिविधियाँ करता है –

  • प्रोसेसर और कार्य की स्थिति पर नज़र रखता है। जिसे ट्रैफिक कंट्रोलर के रूप में जाना जाता है।
  • प्रोसेसर (सीपीयू) को एक कार्य प्रदान करता है।
  • जब कार्य की आवश्यकता नहीं रह जाती है, तो प्रोसेसर को फ्री कर देता है।

Device Management

ऑपरेटिंग सिस्टम, संबंधित ड्राइवरों के माध्यम से डिवाइस के साथ कम्युनिकेशन प्रदान करता है। यह डिवाइस मैनेजमेंट के लिए निम्नलिखित गतिविधियाँ करता है –

  • सभी डिवाइस का ट्रैक रखता है। इस कार्य के लिए जिम्मेदार कार्यक्रम I / O नियंत्रक के रूप में जाना जाता है।
  • निर्णय लेता है कि किस कार्य के लिए कौन सा डिवाइस कब और कितने समय के लिए दिया जायेगा।
  • डिवाइस को परफेक्शन के साथ आवंटित करता है।
  • कार्य समाप्त होने पर उपकरणों को फ्री कर देता है।

File Management

फ़ाइल सिस्टम को सामान्य रूप से डायरेक्टरी के रूप में आसान नेविगेशन और उपयोग के लिए रखा जाता है। ऑपरेटिंग सिस्टम फ़ाइल प्रबंधन के लिए निम्नलिखित गतिविधियाँ करता है –

  • सूचना, स्थान, उपयोग, स्थिति आदि पर नज़र रखता है। कलेक्टिव फीचर्स को  फ़ाइल सिस्टम के रूप में जाना जाता है।
  • यह तय करता है कि कौन सी फाइल किसे मिले।
  • कार्य के हिसाब से फाइल का आवंटन करता है।
  • कार्य पूरा होने पर फाइलों को फ्री कर देता है।

Security

पासवर्ड और इसी तरह की अन्य Technology के माध्यम से यह Programs और Data तक अनधिकृत पहुंच को रोकता है।

Control over system performance

searvice के लिए रिक्वेस्ट और सिस्टम से Respond के बीच की देरी को नियंत्रित करता है।

Job accounting

विभिन्न कार्यों और उपयोगकर्ताओं द्वारा उपयोग किए जाने वाले समय और रिसोर्स पर नज़र रखना।

Error detecting aids

किसी कारनबस अगर कंप्यूटर में कोई एरर आता है तो यह एरर के कारणों का पता लगता है।

Coordination between other software and users

यह कंप्यूटर के अलग-अलग उपयोगकर्ताओं के प्रयोग में लाये जाने वाले अलग-अलग सॉफ़्टवेयर और उपयोगकर्ता के बिच ताल मेल बैठता है।

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